मानवता की दशा और दिशा निरंतर परिवर्तनशील है। सामाजिक मान्यता और व्यक्तिगत आदर्श बदलते रहते हैं। आर्थिक दौड़ में मानव अक्सर नैतिक राह से भटक जाता है और क्षतिग्रस्त होता है। ऐसे में, तूफ़ान में फँसी उसकी नैया को धर्म का प्रकाशस्तंभ दिशा दिखाता है। यहाँ प्रस्तुत हैं धर्म के कुछ ऐसे अडिग स्तंभ, जो बुद्ध की सनातनी शिक्षाओं के विषयवार संकलन से निर्मित हुए हैं।

यह पुस्तक प्रसिद्ध थाई अरहंत भिक्षु अजान चाह के सहज, सीधे और अनुभव-आधारित उपदेशों का संकलन है। इसमें गूढ़ दर्शन के बजाय रोज़मर्रा की भाषा और उदाहरणों के माध्यम से चित्त की शांति, अनासक्ति और सजगता को समझाया गया है। यह पुस्तक बताती है कि जब मन शांत होता है, तो धम्म अपने आप स्पष्ट होने लगता है—और यही साधना का असली सार है।

परमपूज्य आचार्य थानिस्सरो भिक्षु की यह प्रसिद्ध कृति ध्यान-साधना पर आधारित एक सरल, स्पष्ट और पूरी तरह व्यावहारिक मार्गदर्शिका है। यह पुस्तक दो भरोसेमंद स्रोतों से प्रेरित है—एक ओर बुद्ध का आनापान, और दूसरी ओर आचार्य अजान ली धम्मधरो की ध्यान-पद्धति। दोनों के मेल से यह ग्रंथ साधक को समाधि और प्रज्ञा विकसित करते हुए मुक्ति के मार्ग पर सहज रूप से आगे बढ़ने में मदद करता है।

पुण्य ‘धर्म की नींव’ है। पुण्य ‘सुख की इमारत’ है। पुण्य ‘मुक्ति की सीढ़ी’ है। इस पुस्तक में आप जानेंगे कि धर्म की उस नींव को वर्तमान जीवन में कैसे रखा जाता है। सुख की उस इमारत को भविष्य के लिए कैसे खड़ा किया जाता है। और त्रिकाल दुःखमुक्ति की उस सीढ़ी पर कैसे चढ़ा जाता है।

पूज्य गुरु थानिस्सरो भिक्षु की यह पुस्तक बुद्ध के मूल उपदेशों और तर्कसंगत दृष्टिकोण से पुनर्जन्म की अवधारणा को स्पष्ट करती है। यह आधुनिक वैज्ञानिक सोच और बौद्ध परंपरा के बीच एक सेतु का कार्य करती है, यह दिखाते हुए कि पुनर्जन्म केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक सत्य है, जो नैतिकता और जीवन के अर्थ को गहराई से प्रभावित करता है।

यह पुस्तक हर साधक के लिए एक अनिवार्य मार्गदर्शिका है, जो विमुक्ति की ओर ले जाने वाले साधना-संबंधित सूत्रों को उजागर करती है। यह आपके आध्यात्मिक पथ की मौन सहचर बनेगी — मार्गदर्शन देगी, प्रेरित करेगी और आवश्यक होने पर फटकारेगी भी।

परित्त का अर्थ है ‘रक्षा’ या ‘सुरक्षा देने वाले सूत्र।’ बौद्ध परंपरा में, परित्त सूत्रों का पाठ शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक कल्याण के लिए किया जाता है। ये सूत्र भगवान बुद्ध के वचनों पर आधारित हैं और संकट से रक्षा, आशीर्वाद तथा मंगल प्रदान करने की शक्ति रखते हैं।

विश्वप्रसिद्ध और ऐतिहासिक पुस्तक “What the Buddha taught” बौद्ध धर्म का परिचय सरल, स्पष्ट और गहरे तरीके से देती है। दशकों से बौद्ध जगत में इसे एक अनिवार्य पुस्तक माना जाता है।

पूज्य थानिस्सरो भिक्षु एक प्रतिष्ठित थेरवादी भिक्षु और अनुभवी ध्यान-आचार्य हैं, जिन्हें स्नेह से “अजान जेफ़” भी कहा जाता है। आप अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया स्थित Metta Forest Monastery (मेत्ता अरण्य विहार) में निवास करते हैं, जहाँ ध्यान-साधना, धर्म–विनय का अनुशासित अभ्यास और पाली ग्रंथों का अध्ययन–शिक्षण आपके जीवन का स्वाभाविक हिस्सा है।
धर्म और विनय पर आपकी गहरी समझ और सीधी, व्यावहारिक व्याख्याएँ दुनिया भर के भिक्षुओं और साधकों को प्रभावित करती रही हैं। आपने सुत्तपिटक और विनयपिटक के अधिकांश ग्रंथों का अंग्रेज़ी में सरल और सटीक अनुवाद किया है, जिससे पाली बौद्ध साहित्य आम पाठकों तक भी सहज रूप से पहुँच सका है। आपके प्रवचन ध्यान और दर्शन को किसी दार्शनिक बोझ की तरह नहीं, बल्कि रोज़मर्रा के जीवन में उतारने योग्य मार्ग के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
धम्मदीप.com से जुड़े भिक्षुओं के आध्यात्मिक मार्गदर्शन में आपका योगदान विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण रहा है, और आप ही इस मंच की मूल प्रेरणा हैं। आपकी शिक्षाएँ, अनुवाद और प्रवचन dhammatalks पर अंग्रेज़ी में निःशुल्क उपलब्ध हैं, जहाँ से असंख्य साधक निरंतर लाभ ले रहे हैं।

पूज्य अजान चाह थाई वन-परंपरा के महान आचार्यों में से एक थे, जिन्हें अरहंत माना जाता था। उनकी शिक्षाओं ने आधुनिक युग में थेरवाद बौद्ध साधना को नई स्पष्टता और गहराई दी। उनका जीवन सादगी, कठोर साधना और प्रत्यक्ष अनुभव पर आधारित था। उन्होंने उत्तर-पूर्वी थाईलैंड में Wat Nong Pah Pong की स्थापना की, जो आगे चलकर वन-परंपरा का एक प्रमुख केंद्र बना।
अजान चाह की शिक्षाओं की विशेषता उनकी सरलता और सीधापन है। वे गूढ़ दार्शनिक भाषा के बजाय रोज़मर्रा के उदाहरणों से मन, दुःख और आसक्ति की प्रकृति को समझाते थे। उनका जोर पुस्तकीय ज्ञान से अधिक प्रत्यक्ष अभ्यास, सतर्कता और भीतर देखने पर था। वे बार-बार कहते थे कि शांति बाहर नहीं, बल्कि उसी मन में मिलती है जो देखने और छोड़ने को सीख लेता है।
उनके उपदेशों ने न केवल थाई साधकों को, बल्कि पश्चिमी देशों से आए अनेक भिक्षुओं को भी गहराई से प्रभावित किया। उन्हीं के मार्गदर्शन में कई पश्चिमी शिष्य आगे चलकर प्रसिद्ध ध्यान-आचार्य बने। आज अजान चाह की शिक्षाएँ पुस्तकों और प्रवचनों के रूप में संसार भर के साधकों को यह याद दिलाती हैं कि धम्म कोई दूर की वस्तु नहीं, बल्कि इसी जीवन में, इसी क्षण समझे जाने वाला सत्य है।