धम्मपथ पर चलते हुए अनेक भिक्षुओं ने कठिनाइयों का सामना किया, पर विपरीत परिस्थितियाँ भी उनके ब्रह्मचर्य और साधना को डिगा न सकीं। उनके जीवन, दीप की तरह, अंधकार में राह दिखाते हैं — साहस, धैर्य और निर्वाण के संकल्प की प्रेरणा देते हैं। प्रस्तुत हैं उन महापुरुषों की जीवनी, जिन्होंने अपने तप से धम्म की लौ जलाए रखी!
पूज्य बनभन्ते का जीवनी प्रेरणा और समर्पण का प्रतीक है, जो न केवल बांग्लादेश बल्कि पूरे विश्व के बौद्धों के लिए एक अनमोल धरोहर है। अनेक कठिनाइयों का सामना करते हुए, उन्होने अपने ब्रह्मचर्य को परिशुद्ध रखा और अंतिम मंजिल पर पहुँच कर ही दम लिया।
आचार्य ली धम्मधरो २०वीं सदी के थाई अरण्य परंपरा के महान ध्यान आचार्यों में से एक थे। उनकी साधना, निपुणता, और आध्यात्मिक शक्तियाँ अद्वितीय थीं। आचार्य साओ और आचार्य मुन द्वारा स्थापित इस परंपरा में जहाँ अधिकांश भिक्षु जंगलों में तपस्या करते थे, वहीं आचार्य ली ने इसे समाज की मुख्यधारा तक पहुँचाया।