उरुवेला की उस रात, नेरञ्जरा नदी के तट पर इतिहास बदलने वाला था। सिद्धार्थ गौतम 'मध्यम मार्ग' को पा चुके थे, शरीर में बल लौट आया था, और मन एक धारदार हथियार की तरह तैयार था।
यह पालि साहित्य का सबसे लंबा सूत्र है, जो बुद्ध की परिनिर्वाण कथा को विवरण के साथ बताता है। भगवान बुद्ध के अंतिम दिनों के बारे में यहाँ लंबा ब्योरा मिलता है, जिससे बुद्ध के व्यक्तित्व की गहराई झलकती है।