व्रत जो अधूरा रखें, न शील उसके पूर्ण हो। व्रत जो परिपूर्ण करें, शील भी उसके पूर्ण हो।
भगवान बुद्ध का दर्शन लेने के लिए दूसरी दुनियाओं के अनेक देवतागण एकत्र हुए। तब, भगवान ने उनका वर्णन कर, भिक्षुओं का उनसे परिचय कराया।