✦ ॥ नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स ॥ ✦

शील

  • ५. शील

    ५. शील

    📂 ग्रन्थ / पुण्य

    काया से संवर है भला, भला है वाणी से संवर। मन से संवर है भला, भला है सर्वत्र संवर। जो सर्वत्र संवृत शर्मिला, ‘रक्षित’ है कहलाता।