
त्रिपिटक पर हमारा यह परिचय लेख पढ़ें:
सूत्रपिटक बुद्ध के सबसे प्रारम्भिक और प्रमाणिक उपदेशों का संग्रह है, और त्रिपिटक का केंद्र माना जाता है। इसमें भगवान बुद्ध तथा उनके अग्र शिष्यों के उपदेश संवाद, प्रश्न–उत्तर, कथाओं और विवेचन—इन विविध रूपों में सुरक्षित हैं, जिससे धर्म जीवित परंपरा के रूप में सामने आता है।
यहाँ हर सूत्र अपने आप में स्वतंत्र और संपूर्ण है। किसी भी मूल सूत्र का अनुवाद ए॰आई॰ द्वारा नहीं किया गया है। सूत्रपिटक में दस हज़ार से अधिक सूत्र हैं, जिन्हें पाँच निकायों—अर्थात पाँच प्रमुख संग्रहों—में संगठित किया गया है:
यह लंबे उपदेशों का संग्रह, दरअसल, सबसे छोटा ग्रंथ है, जिसमें मात्र ३४ उपदेश हैं। लेकिन इनमें से कई उपदेश संपूर्ण पालि भाषा में सर्वोत्तम साहित्यिक रचना मानी जाती हैं।
मध्यम लंबाई के १५२ उपदेश इस निकाय में शामिल किए गए हैं। दरअसल, यही संग्रह सबसे लोकप्रिय और उपयोगी माना जाता हैं, चाहे गृहस्थ हो अथवा भिक्षु!
कुछ छोटे उपदेशों को विषयानुसार साथ मिलकर “संयुक्त” किया गया हैं। धर्म के विशेष पहलुओं पर इन संयुक्त का आयोजन किया गया है, जैसे कि पाँच उपादान स्कन्ध, प्रतित्य समुत्पाद, आनापान इत्यादि।
🔔 इनका अनुवाद हो रहा है। कृपया धीरज रखें!
संख्यात्मक उपदेशों को इस निकाय में शामिल किया गया हैं, जैसे कि एक से लेकर तक ग्यारह तक। अन्य निकायों की तुलना में यह संग्रह उपासकों के लिए अधिक उन्मुख हैं।
🔔 इनका अनुवाद हो रहा है। कृपया धीरज रखें!
खुद्दक का अर्थ होता है, क्षुद्र! जो उपदेश गाथा में अधिक हो, अथवा ऐसे स्वरूप के हो, जिन्हे किसी अन्य निकाय में नहीं डाला जा सकता, ऐसे सभी सूत्रों को इस निकाय में जगह दी गयी हैं। यही निकाय अनेक शताब्दियों तक विकसित होते रहा हैं।
🔔 इनका अनुवाद हो रहा है। कृपया धीरज रखें!